Delhi Riots 2020: दिल्ली की एक अदालत 24 मार्च को फैसला सुना सकती है कि 2020 के दिल्ली दंगों में कथित भूमिका की जांच के लिए कैबिनेट मंत्री कपिल मिश्रा के खिलाफ FIR दर्ज करने का निर्देश पुलिस को दिया जाए या नहीं।

अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (ACJM) वैभव चौरसिया ने 27 फरवरी को अपना फैसला रोक लिया था, क्योंकि जांच में सामने आया था कि मिश्रा को झूठा फंसाने की साजिश रची गई थी।
यह मामला याचिकाकर्ता मोहम्मद इलियास की अपील पर चल रहा है, जिन्होंने कपिल मिश्रा के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग की थी। हालांकि, दिल्ली पुलिस ने इस याचिका का विरोध किया और कहा कि दंगों में मिश्रा की कोई भूमिका नहीं थी।
अभियोजन पक्ष ने अदालत को बताया कि दिल्ली प्रोटेस्ट सपोर्ट ग्रुप (DPSG) की चैट से यह साफ हुआ है कि चक्का जाम की योजना पहले से ही 15-17 फरवरी 2020 के बीच बनाई गई थी। पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि मिश्रा को जानबूझकर फंसाने की योजना थी।
शिकायतकर्ता ने न सिर्फ कपिल मिश्रा बल्कि दयालपुर के तत्कालीन SHO, बीजेपी विधायक मोहन सिंह बिष्ट, पूर्व विधायक जगदीश प्रधान और सतपाल संसाद समेत कुल छह लोगों के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग की थी।
